क्यों जरुरी है
हर रिश्तों का
निश्चित कर दिया जाये
सम्बोधन
अब जबकि सिमट रहा है
संबंधो का व्याकरण
गौण हो रहे हैं
संबंधो में आत्मीयता
जहाँ सामर्थ्य बन गए हैं
संबंधो का आधार
सम्बोधन भरते हैं
सिर्फ आत्मीयता का स्वांग
ऐसे समय में
जब सम्बोधन रह गयी है
महज औपचारिकता
शिष्टाचार की मज़बूरी
बहुत जरुरी है
बचा रख लिए जाएँ कुछ सम्बन्ध
संबोधनो से परे .
आपकी रचनाये काफी अच्छी है
ReplyDeleteaap ki yaha kavita mujay behad pasand hai.
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